कयामत तक होता रहेगा गौसे पाक का जिक्र
सरफ़राज़ अहमद/मोहम्मद रिज़वान
वाराणसी/ हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी गौसे आज़म की याद में आज देश दुनिया में गौसे पाक के दीवाने जश्ने गौसुलवरा मना रहे हैं। इस दौरान फातेहा, मिलाद और जश्न का दौर व लंगर का जो आयोजन होगा वो पूरे महीने चलता रहेगा।
गौसे पाक की जिन्दगी और करामात पर उलेमा कहते हैं कि गौसे पाक इराक के जीलान में पैदा हुए, लेकिन आज पूरी दुनिया में उनकी चर्चा हो रही है। अल्लाहतआला फरमाता है कि अगर सिर्फ जीलान के लिए गौस बनाता तो जीलान में ही उनकी चर्चा होती, लेकिन गौसे पाक को सारी दुनिया के लिए गौस बनाकर भेजा। इसलिए पूरी दुनिया में गौस पाक का जिक्र होता है और ता कयामत तक होता रहेगा।
हुजूर गौसेपाक पैदाइशी वली हैं। वह सारे वालियो के सरदार हैं।
बरेली के ताजदार आला हजरत इमाम अहमद रज़ा खां फाजिले बरेली फरमाते हैं, ये दिल ये जिगर है, ये आंखे ये सर है जहां चाहो रख दो कदम गौसे आजम।
थैली खून से हुई लाल
एक बार बादशाहे वक्त ने गौस पाक को अशर्फियों की थैली नजराने में पेश किया तो गौसे पाक ने उस थैली को मुट्ठी में लेकर दबाया तो उसमें से खून टपकने लगा और कहा कि तुम रियाया का खून चूस कर मुझे नजराना पेश कर रहे हो। गौसे पाक के इल्म के आगे बादशाह झुक गया। बहुत से गुमराह कहते हैं कि गौसे पाक हम जैसे थे, एक शायर ने इसका जवाब इस तरह दिया हैं,
डूबे सूरज को लौटाओ फिर कहना हम जैसे थे, कंकड़ियों को कलमा पढ़ाओ फिर कहना हम जैसे थे...

Comments
Post a Comment