वाराणसी: अपनों ने छोड़ा साथ, शवों को कंधा देकर पैसे कमा रहे हैं मजदूर कोरोना की विभीषिका किसी के लिए आपदा तो किसी के लिए अवसर है तो किसी के लिए खतरा मोल लेकर दो पैसे कमाने की मजबूरी. ऐसी ही मजबूरी उन मजदूरों की है जिनके हाथों में दिनभर की कमाई का आने वाला चंद पैसा भी कोरोना ने छीन लिया. इसलिए मोक्ष नगरी काशी में यह मजदूर उन बेसहारा शवों का सहारा बन शवयात्रा में कंधा देकर कुछ पैसे भी कमा रहे हैं और मोक्ष के द्वार तक पहुंचा रहे हैं, जिनको संक्रमण के डर से अपने भी कंधा देने से गुरेज कर रहे हैं. इस कोरोना काल ने इंसान को वे हर कुछ सिखा दिया, जिसके लिए ताउम्र भी कम पड़ जाती. कुछ बेसहारों का सहारा अनजान बन रहे हैं तो कइयों ने तो कोरोना के डर से अपनों का ही हाथ छोड़ दिया. मस्तमौला और मोक्षदायिनी काशी भी इससे अछूती नहीं है. मददगार काशी में बगैर मांगे ही लोग एक दूसरे की मदद कर दिया करते थे, लेकिन कोरोना ने इस मदद की भी कीमत तय कर दी. सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन सच है. मोक्ष की कामना के लिए काशी में अंतिम संस्कार भी इतना आसान नहीं रह गया है. लोग किसी तरह अपनों को लेकर आ तो...