Skip to main content

वाराणसी में कोरोना इलाज की संजीवनी बूटी उपलब्ध, DM ने निजी अस्पतालों को उपलब्ध करवाया असहनीय दर्द की यह दवा

वाराणसी में कोरोना इलाज की संजीवनी बूटी उपलब्ध, DM ने निजी अस्पतालों को उपलब्ध करवाया असहनीय दर्द की यह दवा 

    



मोहम्मद रिजवान



वाराणसी। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर जहां हाहाकार मचा हुआ है। प्रतिदिन लोग अपनो को इस दुनिया से विदा होते देख रहे हैं। विडंबना तो यह है कि बहुत लोग इलाज के अभाव में दम तोड दे रहे हैं। इन सबके बीच जो सबसे बड़ा वजह सामने आया है, वह है ऑक्सीजन की कमी। अचानक संक्रमित मरीजों की संख्या कई गुना बढ़ जाने के वजह से ऑक्सीजन की सप्लाई उस अनुपात में नही हो पा रहा है। इसके बावजूद जिले के पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने दिन रात एक कर ऑक्सीजन की सप्लाई सुचारू करने में लगे हुए हैं। खासकर जिले के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा और पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। इसी के चलते आज एक राहत भरी खबर यह आया है कि वाराणसी जिला प्रशासन को वायुमंडल से ऑक्सीजन तैयार करने वाले 75 मशीन उपलब्ध हुआ है, जो कि ऑक्सीजन की कमी से जुंझ रहे मरीजों के लिए काफी राहत वाला होगा। इस बात की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी केआर शर्मा ने बताया कि कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों की सांसों को थमने से बचाने के लिए 75 मेडिकल आक्सीजन कंसेन्ट्रेटर जिला प्रशासन को उपलब्ध हो चुका है। जिसमें 50 दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, 10 एस एस पी जी कबीर चौरा अस्पताल तथा 10 ईएसआईसी पाण्डेयपुर, 5 बी एल डब्ल्यू अस्पताल को उपलब्ध कराया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि यह मशीन वायुमंडल से आक्सीजन निकालती है। इस मशीन से 10 लीटर प्रति मिनट तक आक्सीजन मरीज़ को दिया जा सकता है, जिससे आक्सीजन सेचुरेशन बढ़कर 90 से 95 प्रतिशत तक हो जाता है। इस मशीन से एक साथ दो मरीजों को आक्सीजन दिया जा सकता है।


विद्युत से संचालित यह मशीन ह्यूमिडिफायर बाटल से जुड़ी नोज़ल केनुला के माध्यम से मरीज़ को ऑक्सिजन देता है। आज इस मशीन को कोविड हॉस्पिटल के नोडल ऑफिसर्स को सौंपा गया। इस अवसर पर एमएलसी ए के शर्मा, सुनील ओझा, मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल, जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, नोडल अधिकारी वाराणसी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, एडिशनल सीएमओ डॉ संजय राय सहित अस्पतालों के सीएमएस मौजूद रहे।

Comments

Popular posts from this blog

देश दुनिया में मनायी जा रही ‘ग्यारहवीं शरीफ’ -बड़े पीर साहब के उर्स पर हो रही हैं घरों में फातेहा

 देश दुनिया में मनायी जा रही ‘ग्यारहवीं शरीफ’ -बड़े पीर साहब के उर्स पर हो रही हैं घरों में फातेहा सरफ़राज़ अहमद/मोहम्मद रिज़वान  वाराणसी।  गौसे आज़म हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमां (बड़े पीर साहब) का उर्स-ए-पाक ‘ग्यारहवीं शरीफ’ के रूप में अदबो-एहतराम के साथ आज देश दुनिया में मनाया जा रहा है। फजर की नमाज़ के बाद से ही मदरसों, मस्जिदों व घरों में कुरानख्वानी, फातिहा व महफिल-ए-गौसुलवरा का आयोजन शुरु हो गया। सुबह फज्र की नमाज के बाद कुरआन ख्वानी, नियाज-फातिहा का जो सिलसिला शुरू हुआ वो अब पूरे दिन ही नहीं बाल्कि पूरे महीना चलता रहेगा। इस दौरान जगह जगह गौस़े पाक का लंगर भी चलेगा।  गौसे पाक का वलियों में सबसे ऊंचा मर्तबा मौलाना अज़हरूल कादरी कहते हैं कि अल्लाह के वलियों में सबसे ऊंचा मरतबा हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी यानी गौस-ए-आज़म का है। हमारे औलिया-ए-किराम व मशायख जिस रास्ते से गुजरे उन रास्तों में तौहीद व सुन्नत-ए-नबी का नूर व खुशबू फैल गई। हिन्दुस्तान में ईमान व दीन-ए-इस्लाम बादशाहों के जरिए नहीं आया बल्कि हमारे इन्हीं बुजुर्गों, औलिया व सूफिया के जरिए आया। ऐसे लोग...

सरकार गरीब नवाज़ के दर पर झुकती है कायनात

  सरकार गरीब नवाज़ के दर पर झुकती है कायनात मोहम्मद रिज़वान नई दिल्ली : अजमेर राजस्थान के अजमेर में चल रहे दुनिया के मशहूर सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह,( सरकार गरीब नवाज) के दर पर सारी कायनात झुकती है। ख्वाजा का उर्स इन दिनों अजमेर के साथ ही समूची दुनिया में मनाया जा रहा है। जो अजमेर नहीं जा सके हैं वो जहां हैं वहीं उर्स का आयोजन कर रहें हैं। राजस्थान ही नहीं उत्तर प्रदेश में भी ख्वाजा को लोग याद कर रहे हैं। आज ख्वाजा का कुल शरीफ़ अजमेर में 810 वें सालाना उर्स में मंगलवार को कुल की छठी का आयोजन किया । अकीदतमंद कुल को देखते हुए काल रात से ही दरगाह परिसर के बाहर की दीवारों को गुलाबजल, ईत्र और केवड़े से धोकर कुल के छीटें लगाने शुरू कर दिए कोरोना नियमों में सरकार की ओर से शीथिलता के बाद दरगाह परिसर चौबीस घंटे जायरीनों से आबाद है और उर्स की रौनक न केवल दरगाह क्षेत्र में बल्कि दरगाह के चारों तरफ फैली हुई है। आज रात को दरगाह दीवान और ख्वाजा साहब के सज्जादानशीन सैयद जैनुअल आबेदीन अली खान की सदारत में दरगाह परिसर के महफिलखाने में उर्स की छठी व अंतिम शाही महफिल...

कहते हैं, इस दरवाजे से जो भी जाता है मिल जाती है जन्नत, 2 फरवरी के बाद मिलेगा ये मौका

 कहते हैं, इस दरवाजे से जो भी जाता है मिल जाती है जन्नत, 2 फरवरी के बाद मिलेगा ये मौका अजमेर के सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में एक ऐसा दरवाजा है जो साल में केवल चार बार ही खुलता है. ऐसा माना जाता है कि इस दरवाजे से होकर जाने और इबादत करने वालों को जन्नत नसीब होती है. वैसे तो ये दरवाजा वर्ष में केवल 4 बार खुलता है पर उर्स में ये 6 बार खुलता है. अजमेर में गरीब नवाज की दरगाह पर उर्स की शुरूआत चांद दिखाई देने पर 2 या 3 फरवरी से इसकी शुरूआत हो जाएगी. इसका समापन बड़े कुल की रस्म के साथ होगा. चांद रात को अल सुबह 4 बजे जन्नती दरवाजा खोला जाएगा। हालांकि ये जन्नती दरवाज वर्ष में केवल चार बार ईद उल फितर,बकरा ईद और हजरत उस्मान हारूनी के सालाना उर्स पर 1-1 दिन के लिए खोला जाता है. जन्नती दरवाजा उर्स में आने वाले जायरीन के लिए खोला जाता है। इसी परंपरा के अनुसार यह दरवाजा कुल की रस्म के बाद 6 रजब को बंद कर दिया जाता है. कहते हैं ख्वाजा गरीब नवाज इबादत के लिए इसी रास्ते को काम में लेते थे. ख्वाजा साहब को अल्लाह ने यह कहा कि जो लोग मक्का मदीना की जियारत नहीं कर पाने वालों के लिए य...