Skip to main content

वाराणसी में नाव पर मस्‍ती के मूड में दि‍खे एक्‍टर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और अभिनेत्री नेहा शर्मा

 वाराणसी में नाव पर मस्‍ती के मूड में दि‍खे एक्‍टर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और अभिनेत्री नेहा शर्मा










मोहम्मद रिजवान



वाराणसी। नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और नेहा शर्मा अभिनीत निर्देशक कुशान नंदी की अपकमिंग फिल्म जोगीरा सारा रा रा! की शूटिंग ख़त्म हो चुकी है। इस फिल्म की आखरी शूटिंग वाराणसी में दोनों कलाकारों के ऊपर फिल्‍मायी गयी। इसके बाद अभिनेत्री नेहा शर्मा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर बनारस की ख़ूबसूरती का बखान किया है। 


फिल्म की शूटिंग वाराणसी में खत्म होने के बाद फिल्म क्रू मेंबर, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और नेहा शर्मा ने बजड़े पर जमकर नौका विहार का आनंद लिया। इसके अलावा ऐक्ट्रेस नेहा शर्मा ने अपनी ट्विटर वाल पर गंगा आरती का एक वीडियो अपलोड किया और अपनी और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ फोटो शेयर 


करते हुए लिखा कि 'एक सुन्दर यात्रा आज समाप्त हुई। फिल्म जिसकी शूटिंग ख़त्म हुई उसे देखने के लिए आप भी इंतज़ार मत कीजिये। एक अच्छी टीम के साथ हमने काम किया और रोज़ कुछ नया सीखने को मिला।


बता दें की फिल्म की पटकथा मशहूर संगीतकार असद भोपाली के लड़के ग़ालिब असद भोपाली ने लिखी है। लखनऊ और बनारस पर आधारित इस फिल्म की शूटिंग भी इन्ही दोनों शहरों में गुपचुप तरीके से की गयी है। अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और नेहा शर्मा की यह फिल्म कॉमेडी, लव और ड्रामे से भरपूर है और इसे इसी साल की अगली छमाही में रिलीज़ करने की कोशिश की जा रही है। फिल्म में अब संगीत पर काम हो रहा है।  


फिल्म के निर्देशक के अनुसार फिल्म में लखनऊ और बनारस के ऐसे इलाके देखने को मिलेंगे जिन्हे लोग आज तक नहीं जानते पर समीक्षकों की माने तो लोगों का ध्यान फिल्म की स्टोरी पर ज़्यादा रहेगा क्योंकि इसमें लीड हीरो-हिरोईन के बीच प्यार नहीं है।

Comments

Popular posts from this blog

देश दुनिया में मनायी जा रही ‘ग्यारहवीं शरीफ’ -बड़े पीर साहब के उर्स पर हो रही हैं घरों में फातेहा

 देश दुनिया में मनायी जा रही ‘ग्यारहवीं शरीफ’ -बड़े पीर साहब के उर्स पर हो रही हैं घरों में फातेहा सरफ़राज़ अहमद/मोहम्मद रिज़वान  वाराणसी।  गौसे आज़म हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमां (बड़े पीर साहब) का उर्स-ए-पाक ‘ग्यारहवीं शरीफ’ के रूप में अदबो-एहतराम के साथ आज देश दुनिया में मनाया जा रहा है। फजर की नमाज़ के बाद से ही मदरसों, मस्जिदों व घरों में कुरानख्वानी, फातिहा व महफिल-ए-गौसुलवरा का आयोजन शुरु हो गया। सुबह फज्र की नमाज के बाद कुरआन ख्वानी, नियाज-फातिहा का जो सिलसिला शुरू हुआ वो अब पूरे दिन ही नहीं बाल्कि पूरे महीना चलता रहेगा। इस दौरान जगह जगह गौस़े पाक का लंगर भी चलेगा।  गौसे पाक का वलियों में सबसे ऊंचा मर्तबा मौलाना अज़हरूल कादरी कहते हैं कि अल्लाह के वलियों में सबसे ऊंचा मरतबा हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी यानी गौस-ए-आज़म का है। हमारे औलिया-ए-किराम व मशायख जिस रास्ते से गुजरे उन रास्तों में तौहीद व सुन्नत-ए-नबी का नूर व खुशबू फैल गई। हिन्दुस्तान में ईमान व दीन-ए-इस्लाम बादशाहों के जरिए नहीं आया बल्कि हमारे इन्हीं बुजुर्गों, औलिया व सूफिया के जरिए आया। ऐसे लोग...

सरकार गरीब नवाज़ के दर पर झुकती है कायनात

  सरकार गरीब नवाज़ के दर पर झुकती है कायनात मोहम्मद रिज़वान नई दिल्ली : अजमेर राजस्थान के अजमेर में चल रहे दुनिया के मशहूर सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह,( सरकार गरीब नवाज) के दर पर सारी कायनात झुकती है। ख्वाजा का उर्स इन दिनों अजमेर के साथ ही समूची दुनिया में मनाया जा रहा है। जो अजमेर नहीं जा सके हैं वो जहां हैं वहीं उर्स का आयोजन कर रहें हैं। राजस्थान ही नहीं उत्तर प्रदेश में भी ख्वाजा को लोग याद कर रहे हैं। आज ख्वाजा का कुल शरीफ़ अजमेर में 810 वें सालाना उर्स में मंगलवार को कुल की छठी का आयोजन किया । अकीदतमंद कुल को देखते हुए काल रात से ही दरगाह परिसर के बाहर की दीवारों को गुलाबजल, ईत्र और केवड़े से धोकर कुल के छीटें लगाने शुरू कर दिए कोरोना नियमों में सरकार की ओर से शीथिलता के बाद दरगाह परिसर चौबीस घंटे जायरीनों से आबाद है और उर्स की रौनक न केवल दरगाह क्षेत्र में बल्कि दरगाह के चारों तरफ फैली हुई है। आज रात को दरगाह दीवान और ख्वाजा साहब के सज्जादानशीन सैयद जैनुअल आबेदीन अली खान की सदारत में दरगाह परिसर के महफिलखाने में उर्स की छठी व अंतिम शाही महफिल...

कहते हैं, इस दरवाजे से जो भी जाता है मिल जाती है जन्नत, 2 फरवरी के बाद मिलेगा ये मौका

 कहते हैं, इस दरवाजे से जो भी जाता है मिल जाती है जन्नत, 2 फरवरी के बाद मिलेगा ये मौका अजमेर के सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में एक ऐसा दरवाजा है जो साल में केवल चार बार ही खुलता है. ऐसा माना जाता है कि इस दरवाजे से होकर जाने और इबादत करने वालों को जन्नत नसीब होती है. वैसे तो ये दरवाजा वर्ष में केवल 4 बार खुलता है पर उर्स में ये 6 बार खुलता है. अजमेर में गरीब नवाज की दरगाह पर उर्स की शुरूआत चांद दिखाई देने पर 2 या 3 फरवरी से इसकी शुरूआत हो जाएगी. इसका समापन बड़े कुल की रस्म के साथ होगा. चांद रात को अल सुबह 4 बजे जन्नती दरवाजा खोला जाएगा। हालांकि ये जन्नती दरवाज वर्ष में केवल चार बार ईद उल फितर,बकरा ईद और हजरत उस्मान हारूनी के सालाना उर्स पर 1-1 दिन के लिए खोला जाता है. जन्नती दरवाजा उर्स में आने वाले जायरीन के लिए खोला जाता है। इसी परंपरा के अनुसार यह दरवाजा कुल की रस्म के बाद 6 रजब को बंद कर दिया जाता है. कहते हैं ख्वाजा गरीब नवाज इबादत के लिए इसी रास्ते को काम में लेते थे. ख्वाजा साहब को अल्लाह ने यह कहा कि जो लोग मक्का मदीना की जियारत नहीं कर पाने वालों के लिए य...