Skip to main content

वाराणसी फास्‍ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला, ज्ञानवापी मस्‍जि‍द परि‍सर के पुरातात्‍वि‍क सर्वेक्षण कराने का दि‍या आदेश

 वाराणसी फास्‍ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला, ज्ञानवापी मस्‍जि‍द परि‍सर के पुरातात्‍वि‍क सर्वेक्षण कराने का दि‍या आदेश 



मोहम्मद रिजवान



वाराणसी। स्वयंम्भू लॉर्ड विश्वेश्वर ज्‍योति‍र्लिंग वर्सेज अंजुमन इंतेज़ामिया कमेटी मस्जिद और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बीच चल रहे पुरातत्विक सर्वे के मामले में सिविल जज सीनियर डिवीज़न फास्ट ट्रैक कोर्ट वाराणसी आशुतोष तिवारी ने आज फैसला सुनाते हुए पुरातत्विक सर्वे का आदेश दे दिया है। इस आदेश में उन्होंने केंद्र सरकार को अपने खर्चे पर यह सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया है, साथ ही इस सर्वे में पुरातात्विक सर्वे ऑफ़ इंडिया के 5 विख्यात पुरात्तत्ववेत्ताओं को शामिल करने का आदेश दिया है जिसमे दो अल्‍पसंख्‍यक समुदाय से होंगे। 


इस फैसले पर स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर ज्‍योति‍र्लिंग के वाद मित्र तथा सीनि‍यर एडवोकेट विजय शंकर रस्तोगी ने ख़ुशी ज़ाहिर की है। वहीँ सुन्‍नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के वकील मोहम्मद तौहीद खान ने फैसले की कॉपी को स्टडी करने के बाद अगला निर्णय लेने की बात कही है। 


इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रया देते हुए वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि सिविल जज सीनियर डिवीज़न फास्ट ट्रैक कोर्ट वाराणसी आशुतोष तिवारी के न्यायालय में वादी पक्ष की तरफ से 2019 से प्रार्थना पत्र दिया गया था कि ज्ञानवापी परिसर में स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान् विश्वेश्वर का पुराना मंदिर स्थित था और उसमे 100 फुट का ज्योतिर्लिंग मौजूद था, जोकि‍ एक भव्य मंदिर स्वरुप में ज्ञानवापी परिसर में था। 


इसको धार्मिक विद्वेष के कारण बादशाह औरंगजेब ने 1669 के फरमान के द्वारा इसे तोड़वा दिया था और उसके एक हिस्से पर स्थानीय मुसलमानों द्वारा एक ढांचा बना दिया गया था, जिसे वो मस्जिद कहते हैं और नमाज़ पढ़ते हैं, लेकिन विवाद यह था कि 15 अगस्त 1947 को इसकी धार्मिक स्थिति क्या थी। इसको तय करने के लिए यह साक्ष्य आवश्यक है कि यह विवादित ढांचा बनने के पहले पुरातन कोई विश्वेश्वर मंदिर का अवशेष वहां उपलब्ध है कि नहीं। उसक नीचे तहखाना उपलब्ध है कि नहीं। उसके अगल-बगल मंदिर का अवशेष है कि नहीं।  


विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि मंदिर की दीवारों को नंगी आँखों से देखा जा सकता है कि नहीं। इसका पुरातत्व विभाग सर्वेक्षण करे और जो 100 फुट ऊँचा ज्योतिर्लिंग है उसको संरक्षित करने के लिए माननीय न्यायालय ने बहुत लंबा निर्देश दिया है। वाद मित्र ने बताया कि कोर्ट ने आदेशित किया है कि पुरातत्व विभाग, सेंट्रल गवर्नमेंट इसका सर्वेक्षण अपने खर्चे पर करके अपनी आख्या दे। इस सर्वेक्षण में प्रख्यात पुरातत्वविदों को इस कार्य में सम्मिलित करे, जिसमें दो पुरातत्ववेत्ता माईनार्टी के भी होने चाहिए। 


वहीँ इस आदेश पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता मोहम्मद तौहीद खान ने बताया कि हमने बहस की और कोर्ट को बताया कि इस स्टेज पर सर्वे का आदेश नहीं देना चाहिए, पर आज कोर्ट ने स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी की आर्क्योलॉजिकल सर्वे की अपील को मान लिया है। हमारे पास अभी आदेश की कॉपी नहीं आयी है। उसे स्टडी करने के बाद जो कानूनी प्रोसेस हैं उसके अनुरूप कार्य करेंगे।

Comments

Popular posts from this blog

देश दुनिया में मनायी जा रही ‘ग्यारहवीं शरीफ’ -बड़े पीर साहब के उर्स पर हो रही हैं घरों में फातेहा

 देश दुनिया में मनायी जा रही ‘ग्यारहवीं शरीफ’ -बड़े पीर साहब के उर्स पर हो रही हैं घरों में फातेहा सरफ़राज़ अहमद/मोहम्मद रिज़वान  वाराणसी।  गौसे आज़म हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमां (बड़े पीर साहब) का उर्स-ए-पाक ‘ग्यारहवीं शरीफ’ के रूप में अदबो-एहतराम के साथ आज देश दुनिया में मनाया जा रहा है। फजर की नमाज़ के बाद से ही मदरसों, मस्जिदों व घरों में कुरानख्वानी, फातिहा व महफिल-ए-गौसुलवरा का आयोजन शुरु हो गया। सुबह फज्र की नमाज के बाद कुरआन ख्वानी, नियाज-फातिहा का जो सिलसिला शुरू हुआ वो अब पूरे दिन ही नहीं बाल्कि पूरे महीना चलता रहेगा। इस दौरान जगह जगह गौस़े पाक का लंगर भी चलेगा।  गौसे पाक का वलियों में सबसे ऊंचा मर्तबा मौलाना अज़हरूल कादरी कहते हैं कि अल्लाह के वलियों में सबसे ऊंचा मरतबा हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी यानी गौस-ए-आज़म का है। हमारे औलिया-ए-किराम व मशायख जिस रास्ते से गुजरे उन रास्तों में तौहीद व सुन्नत-ए-नबी का नूर व खुशबू फैल गई। हिन्दुस्तान में ईमान व दीन-ए-इस्लाम बादशाहों के जरिए नहीं आया बल्कि हमारे इन्हीं बुजुर्गों, औलिया व सूफिया के जरिए आया। ऐसे लोग...

सरकार गरीब नवाज़ के दर पर झुकती है कायनात

  सरकार गरीब नवाज़ के दर पर झुकती है कायनात मोहम्मद रिज़वान नई दिल्ली : अजमेर राजस्थान के अजमेर में चल रहे दुनिया के मशहूर सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह,( सरकार गरीब नवाज) के दर पर सारी कायनात झुकती है। ख्वाजा का उर्स इन दिनों अजमेर के साथ ही समूची दुनिया में मनाया जा रहा है। जो अजमेर नहीं जा सके हैं वो जहां हैं वहीं उर्स का आयोजन कर रहें हैं। राजस्थान ही नहीं उत्तर प्रदेश में भी ख्वाजा को लोग याद कर रहे हैं। आज ख्वाजा का कुल शरीफ़ अजमेर में 810 वें सालाना उर्स में मंगलवार को कुल की छठी का आयोजन किया । अकीदतमंद कुल को देखते हुए काल रात से ही दरगाह परिसर के बाहर की दीवारों को गुलाबजल, ईत्र और केवड़े से धोकर कुल के छीटें लगाने शुरू कर दिए कोरोना नियमों में सरकार की ओर से शीथिलता के बाद दरगाह परिसर चौबीस घंटे जायरीनों से आबाद है और उर्स की रौनक न केवल दरगाह क्षेत्र में बल्कि दरगाह के चारों तरफ फैली हुई है। आज रात को दरगाह दीवान और ख्वाजा साहब के सज्जादानशीन सैयद जैनुअल आबेदीन अली खान की सदारत में दरगाह परिसर के महफिलखाने में उर्स की छठी व अंतिम शाही महफिल...

कहते हैं, इस दरवाजे से जो भी जाता है मिल जाती है जन्नत, 2 फरवरी के बाद मिलेगा ये मौका

 कहते हैं, इस दरवाजे से जो भी जाता है मिल जाती है जन्नत, 2 फरवरी के बाद मिलेगा ये मौका अजमेर के सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में एक ऐसा दरवाजा है जो साल में केवल चार बार ही खुलता है. ऐसा माना जाता है कि इस दरवाजे से होकर जाने और इबादत करने वालों को जन्नत नसीब होती है. वैसे तो ये दरवाजा वर्ष में केवल 4 बार खुलता है पर उर्स में ये 6 बार खुलता है. अजमेर में गरीब नवाज की दरगाह पर उर्स की शुरूआत चांद दिखाई देने पर 2 या 3 फरवरी से इसकी शुरूआत हो जाएगी. इसका समापन बड़े कुल की रस्म के साथ होगा. चांद रात को अल सुबह 4 बजे जन्नती दरवाजा खोला जाएगा। हालांकि ये जन्नती दरवाज वर्ष में केवल चार बार ईद उल फितर,बकरा ईद और हजरत उस्मान हारूनी के सालाना उर्स पर 1-1 दिन के लिए खोला जाता है. जन्नती दरवाजा उर्स में आने वाले जायरीन के लिए खोला जाता है। इसी परंपरा के अनुसार यह दरवाजा कुल की रस्म के बाद 6 रजब को बंद कर दिया जाता है. कहते हैं ख्वाजा गरीब नवाज इबादत के लिए इसी रास्ते को काम में लेते थे. ख्वाजा साहब को अल्लाह ने यह कहा कि जो लोग मक्का मदीना की जियारत नहीं कर पाने वालों के लिए य...