10 मोहर्रम से जुड़ा है इस्लामी इतिहास का कई चेप्टर, आप भी जाने पूरा डिटेल
सरफराज अहमद
शहादते हुसैन के साथ ही इस दिन कई नबियों का हुआ जन्म, हजरत नूह की कश्ती को मिला था किनारा
वाराणसी :- मोहर्रम पर अकसर लोग मुबारक बाद देते सुने जाते है इस पर कई लोगो का कमेंट आता है कि मोहर्रम में तो इमाम हुसैन की शहादत हुई थी फिर नये साल की मुबारकबाद क्यों उलेमा कहते है कि इमाम हुसैन रजियउल्लाहु तआला अन्हु की शहादत के साथ ही इस महीने में बहुत सारे अच्छे काम भी हुए है पहले तो ये जानिये की मोहर्रम को मुहररमुल हराम क्यों कहते है इस लिए की जमानाये जाहिलियत में भी इस महीने में जंग हराम थी, इस लिए इसे मोहर्रमुल हराम भी कहा जाता है। इस महीने की 10 तारीख को हजरत सैय्यदना आदम अलैहिस्सलाम की तौबा रब ने कुबूल की थी। इसलिए इस तारीख का मर्तबा काफी बढ़ जाता है। यही नहीं हजरत सैय्यदना यूनुस अलैहिस्सलाम की भी तौबा भी रब ने कुबूल की थी और वो मछली के पेट से बाहर आते थे। यही नहीं जब हजरत सैय्यदना नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती तूफान में फंसी थी तो वो मोहर्रम की 10 तारीख को ही जुदी पहाड़ के किनारे आकर ठहर गयी थी। उस दिन शुकराने का रोजा रखा गया और तमाम को रोजा रखवाया गया। ये इस्लाम की वो तारीख भी है जिस दिन हजरत सैय्यदना इब्राहिम अलैहिस्सलाम पैदा हुए थे। मोहर्रम की 10 तारीख को इस बात की खुशी भी सुन्नी मुस्लिम मनाते है। बात यही खत्म नहीं हुई। मोहर्रम की 10 तारीख को ही हजरत सय्यदना ईसा अलैहिस्सलाम पैदा हुए थे। उनकी पैदाइस भी इसी दीन मनायी जाती है। ये वो तारीख है जिस दिन हजरत सैय्यदना यूसुफ अलैहिस्सलाम कैद से बाहर आ गए थे। मोहर्रम की ही 10 तारीख को हजरत सैय्यदना मूसा अलैहिस्सलाम की भी पैदाइस है। मोहर्रम में इसी दिन हजरत सैय्यदना इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर आग गुलजार हुई तो हजरत सैय्यदना अय्यूब अलैहिस्सलाम बीमारी से शिफा पायी। 10 मोहर्रम को ही हजरत सैय्यदना याकूब अलैहिस्सलाम की आँख की रोशनी वापस आ गयी थी। हजरत सैय्यदना यूसुफ अलैहिस्सलाम कुएं से बाहर निकले थे तो इसी दिन हजरत सैय्यदना सुनेमान अलैहिस्सलाम को बादशाहत मिली। ऐसे ही हजरत सैय्यदना मूसा अलैहिस्सलाम जादूगरों पर ग़ालिब आये वो भी तारीख 10 मोहर्रम थी। हजरत सैय्यदना इदरीस अलैहिस्सलाम जन्नत में पहुँचे। इसी यौमे आशूरा को फिरओन का लश्कर गर्क हुआ। इसी दिन पहली बार बारिश हुई।
आसमान, कुर्सी, कलम, पहाड़, व समुन्दर 10 मोहर्रम को ही पैदा हुए। इसी दिन असहाबे कहफ़ करवटे बदलते है। 10 मोहर्रम को ही सैय्यदना हजरत हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की शहादत हुई और 10 मोहर्रम को ही कयामत आएगी। यही वजह है कि शिया वर्ग गमे हुसैन मनाता है तो सुन्नी इमाम हुसैन की शहादत को सलाम करते है

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