यौमे आशूरा कल, आज बैठ जाएगी ताजिया, घरों में मलीदा, शर्बत की होगी फातेहा, रखे जाएंगे दो रोजे
मोहम्मद रिजवान
वाराणसी :- आज 9 वीं मोहर्रम है यानी कर्बला के शहीदों की शहादत की पूर्व संध्या। आज शाम नगर औऱ आसपास के सभी इमामबाड़ों और इमाम चौकों पर अकीदत के साथ सोशल डिस्टनसिंग का पालन करते हुए ताजिया बैठा दी जाएगी। इस दौरान इमाम चौकों, इमामबाड़ों और घरों में मलीदा, शर्बत आदि की फातेहा करायी जाएगी। कल कर्बला के शहीदों की शहादत का दिन है। कर्बला के मैदान में 10 मोहर्रम को ही इमाम हुसैन समेत 72 लोग यजीदी सेना से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। इस दिन को यौमे आशूरा भी कहा जाता है। कोरोना काल को देखते हुए 10 मोहर्रम को सोशल डिस्टनसिंग के साथ ताजिये के फूल कर्बला में दफन किये जायेंगे। इस बार तमाम अंजुमनों ने भी ऐलान किया है कि कोई जुलूस नहीं निकलेगा। कल मस्जिदों में शहादत नामा होगा और मोमिनीन रोजा रखेंगे। सुन्नी घरों में खीचड़े की फातेहा होगी। मोहर्रम की 8 तारीख को इमाम हुसैन के बावफ़ा और बहादुर भाई हजरत अब्बास की याद में जगह-जगह मजलिसों का आयोजन कोविड नियमों के अनुपालन में किया गया। इसी क्रम में दालमंडी के चहमामा इलाके से ख्वाजा नब्बू साहब के इमामबाड़े से उठने वाले विश्व प्रसिद्ध और 250 साल पुराने तुर्बत का जुलूस नहीं उठा मगर मजलिस हुई और ताबूत सजाया गया। यहाँ फतेह अली खां और उनके हमराहियों ने भी अपने पुरखों की परम्परा का निर्वहन करते हुए शहनाई बजाई।
मुनाजिर हुसैन मंजू ने बताया कि इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास की याद में उठने वाला 8 मोहर्रम का जुलूस इस वर्ष भी कोरोना गाइडलाइंस के अनुरूप मुल्तवी रखा गया। अब्बास मुतूर्जा शम्सी ने यहां मर्सिया पड़ा। इसके बाद हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद अमीन हैदर ने मजलिस को खिताब फरमाया। इसके बाद शराफत अली खां ने हमराहियों के साथ इमामबाड़ों में ही सवारी पढ़ी। इसके बोल थे हाजब हाथ कलम हो गए सक्काए हरम के सवारी सुनकर लोगो की आँखों से अश्क जारी हो गया। इसके बाद अंजुमन हैदर चौक बनारस ने नोहा मातम किया।
मारा गया है तीर से बच्चा रबाब...बुधवार की रात भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के परिवार के लोगो ने शहनाई से आंसुओ का नजराना पेश किया। उनके पौत्र आफाक हैदर ने बताया कि मोहर्रम का चांद दिखते ही खां साहब दुनिया के जिस भी कोने में होते थे अपने घर वापस आ जाते थे। वो दरगाहे फातमान में अमन जीवन भर शहनाई से आंसुओ का नजराना पेश करते थे। उस परंपरा को आज उनके पौत्र आफाक हैदर, नासिर अब्बास, जाकिर हुसैन ने शहनाई बजाकर कायम रखा।उनका पसंदीदा नोहा, मारा गया तीर से बच्चा रबाब दूसरे नोहा, प्रदेश में बहन को किस पर छोड़ कर जाते हो भैया हुसैन क्यों मुँह मोड़ कर...पेश किया गया। इस मौके पर शकील अहमद जादूगर, अनीश खान, भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान साहब के बेटे नाजिम हुसैन आदि मौजूद थे।

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