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यौमे आशूरा पर मस्जिदों में हुआ शहादतनामा, घरों में मलीदा, शर्बत व खिचड़े की हुई फातेहा, रखा गया रोज़ा

 यौमे आशूरा पर मस्जिदों में हुआ शहादतनामा, घरों में मलीदा, शर्बत व खिचड़े की हुई फातेहा, रखा गया रोज़ा




मोहम्मद रिजवान



वाराणसी:- कर्बला के शहीदों की शहादत यौमे आशुरा पर घरों में जहां खिचड़े की फातेहा करायी गयी वहीं दूसरी ओर मस्जिदों में शहादतनामा हुआ जिसमें कर्बला के शहीदों की जिन्दगी और उनके किरदार पर उलेमा व इमाम साहेबान ने रौशनी डाली।  


इससे पहले पूर्व संध्या पर नगर और आसपास के स•ाी इमामबाड़ों और इमाम चौकों पर अक़ीदत के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ताज़िया बैठा दी गयी थी। इस दौरान इमाम चौको, इमामबाड़ों और घरों में मलीदा, शर्बत आदि की फातेहा करायी गयी। फातेहा के बाद मन्नते मांगने वाला कर्बला के शहीदों की याद में रखी गयी ताज़िया की ज़ियारत करने लोगों का हुजुम शहर •ार में उमड़ा। इस दौरान हरिश्चन्द घाट स्थित कुम्हार के इमामबाड़े में कुम्हार की ताजिया, कोयला बाजार में नगीने की ताजिया, अर्दली बाजार की जरी व लल्लापुरा की मशहूर रांगे की ताजिया की जियारत को लोगों का हुजूम देर रात तक उमड़ा हुआ था। इस दौरान सोशल डिस्टेसिंग का पूरा ख्याल रखा जा रहा था।  इस बार  मोहर्रम पर किसी भी तरह का कोई जुलूस कोविड के चलते नहीं उठाया जायेगा इसलिए समाचार लिखे जाने तक ताजिये का फूल कर्बला में दफ्न किये जाने का क्रम शुरू हो चुका था। तेलियानाला घाट, शिवाला घाट, दरगाहे फातमान के साथ ही अन्य जगहों पर लोग ताज़िये और मन्नती ताजिया का फूल ले जाकर ठंडा करते दिखाई दे रहे थे।


दरअसल आज कर्बला के शहीदों की शहादत का दिन है। कर्बला के मैदान में 10 मोहर्रम को ही इमाम हुसैन समेत 72 लोग यज़ीदी सेना से लड़ते हुए शहीद हो गये थे। इस दिन को यौमे आशुरा भी कहा जाता है। 


अज़ाखानों में हुई मजलिस, दर्द भरे नौहों पर हुआ मातम


कर्बला के शहीदों की याद में शिया वर्ग ने अज़ाखानों में जहां मजलिसे की वहीं दर्द •ारे नौहों पर ज़ोरदार मातम का नज़राना पेश किया गया। इस दौरान शिवाला, मदनपुरा, लल्लापुरा, कालीमहाल, नईसड़क, पितरकुंडा, चौहट्टालाल खां, अर्दली बाज़ार आदि इलाक़ों में शहर की तकरीन 25 अंजुमनों ने कर्बला के शहीदे आज़म इमाम हुसैन समेत 72 शहीदों को खिराज़े अक़ीदत पेश किया। इस दौरान •ाले ही जुलूस नहीं निकाले गये मगर नौहाख्वानी और मातम का दौर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ चलता रहा। समाचार लिखे जाने तक अज़ाखाने गुलज़ार थे। इससे पूर्व नौवी मोहर्रम को देर रात शहर •ार के अजाÞखानों में मजलिसे हुई और गश्ती अलम उठाया गया। ताज़िये की जियारत के साथ दुलदुल और ताबूत •ाी अजाखानो में उठा। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदरी ने बताय कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मजलिस और मातम का दौर देर शाम तक चलता रहेगा मगर इस बार कोविड के चलते कोई भी जुलूस नहीं निकाला जायेगा।

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