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वाराणसी काली महल में इमाम रजा की शहादत पर उठा अंगूरी ताबूत

 वाराणसी काली महल में इमाम रजा की शहादत पर उठा अंगूरी ताबूत





वाराणसी 24 सितंबर काली महल की मस्जिद में इमाम रजा का ताबूत उठाया गया । यह ताबूत पिछले 38 सालों से ख्वातीन उठा रही है । इस ताबूत को अंगूरों से सजाया जाता है, ज्ञात हो की सन  204 हिजरी में ईरान के खुरासान शहर में शिया मुसलमानों के आठवें इमाम अली रजा को अब्बासी बादशाह मामून रशीद ने अंगूरों में जहर मिलाकर दिया था । 

पिछले 2 वर्षों से यह ताबूत बहुत कम संख्या में ख्वातीन की उपस्थिति में मनाया जा रहा है। इस ताबूत की कई परंपराएं कॉविड की वजह से नहीं मनाई गई । 

आयोजकों और अज़दारो ने एक समय पर भीड़ कम करने के लिए इमाम का गम दिन भर मनाया ।  ताबूत पर नजर दिन में ही हो गई जिसके बाद अज़दारो ने बारी बारी से ताबूत की ज़ियारत  की । मुख्य मजलिस कम लोगों में हुई ।  मजलिस को खिताब नरजिस नकवी कानपुर  ने किया  और माह तलत ने हदीस ए किसा पढ़ी कनीज़ फातिमा ने कुराने पाक की तिलावत की नौशीन फातिमा ने मुनाजात पढ़ा महरीन और ताज़िन ने सोज़ पढ़ा और इसके बाद इमरोज़ फातिमा, शिखा ने नौहा पढ़ा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की बेटी ज़रीना फातिमा ने भी नौहा पढ़ा ।

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