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हाय इमाम ए अस्करी की सदा के साथ दालमंडी से निकला साठे का जुलूस

 हाय इमाम ए अस्करी की सदा के साथ दालमंडी से निकला साठे का जुलूस











वाराणसी। शिया मुसलमानों के 11वें इमाम हसन अस्करी (अ.स.) की शहादत के मौके पर दालमंडी स्थित सफदर और शब्बीर के इमामबाड़े से साठे का जुलूस कोविड गाइडलाइन के अनुपालन मे उठाया गया।  इस जुलूस के साथ ही शिया संप्रादाय का शोक का 2 महिना 8 दिन चलने वाला मुहर्रम भी ख़त्म हो जायेगा।



यह जुलूस कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपने पारंपरिक रास्तों से होता हुआ दरगाह फातमान लल्लापुरा मे आकार समाप्त होगा।


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जुलूस मे इमाम हुसैन के भाई हज़रत अब्बास की याद मे सबसे आगे शबीहे अलम चल रही है। उसके बाद अंजुमन हैदरी चौक, बनारस का मातमी दस्ता मातम करता हुआ चल रहा है। इस मातमी दस्ते के बाद शबीहे सवारिए इमाम हुसैन (अ.स.) जुलजनहा चल रहा है। उसके बाद 11वें इमाम हसन अस्करी (अ.स.) की शबीहे तुरबत है।  इसके पीछे इमाम हुसैन की घर की औरतों की सवारियों की शबीह अमारी के रूप में है, जिसकी औरत-मर्द ज़ियारत कर रहे हैं और उसपर फूल चढ़ा रहे हैं।



जुलूस उठने से पहले मजलिस को खेताब करते हुए लखनऊ से आए मौलाना इरशाद अब्बास नक़वी ने बताया कि इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 71 साथियों जिसमे एक 6 माह का बच्चा भी था।  सबको तीन दिन का भूखा और प्यासा शहीद करने के बाद उस वक्त के दुर्दांत बादशाह और वक्त के पहले आतंकवादी यजीद के हुक्म पर उनकी औरतों, बच्चों और बीमार बेटे को पैदल करबला से कूफा और कूफा से शाम तक पैदल अजियत (यांतनाए) देते हुए ले जाया गया।



यज़ीदी फ़ौज ने बच्चों और औरते के गले एक रस्सी से बांध दिए थे।  यदि औरतें उठती थीं तो बच्चों का गला कसने लगता था और वो दर्द से तड़पा उठते थे . बच्चों को दर्द से बचाने के लिए इमाम के घर की औरतों ने 3590 किलोमीटर का सफर कमर को झुकाकर किया .यही नहीं यदि कोई औरत या बच्चा चलते चलते रुक जाता था तो उसे कोड़ों से मारा जाता था।



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मौलाना की इना बातों से सभी अजादार रोने लगे। मौलाना ने बताया कि इमाम हुसैन और उनके साथियों को सिर्फ इसलिये शहीद कर दिया गया क्योंकि इमाम हुसैन ने अपने नाना पैगंबर साहब के दीन को बचाने के लिए यजीद कि शर्तों पर अपनी हामी नहीं दी थी। यजीद इस्लाम में शराब जैसी हराम चीज़ों को जायज़ करना चाहता था।


जुलूस इस समय कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपने क़दीमी रास्तों से होता हुआ दरगाह फातमान कि तरफ बढ़ रहा है। जुलूस कि सुरक्षा मे पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।  जुलूस उठने के पहले एसीपी दशाश्वमेध आशुतोष पाण्डेय ने पुरानी अदालत पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था देखी और आवश्यक दिशा निर्देश दिये।

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