वाराणसी : हड़हा मैदान से आज निकलेगा ईद मिलादुन्नबी का क़दीमी जुलूस
मोहम्मद रिजवान
वाराणसी। मरकज़ी यौमुन्नबी कमेटी बनारस की ओर से हर साल जश्ने ईद मिलादुन्नबी का आयोजन किया जाता है। मानवता के पथ प्रदर्शक पैगम्बर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर एक विशाल जुलूस उठाया जाता है, जिसमें अंजुमनें दरूदो सलाम का नजराना पेश करती हैं। यह जुलूस बेनियाबाग के पूर्वी छोर हड़हा मैदान से उठता है और सराय हड़हा, छत्तातले, नारियल बाजार, दालमण्डी, नई सड़क, मस्जिद खुदा बख्श जायसी (लंगड़े हाफिज), फारान होटल, नई सड़क चौराहा कुरैशाबाद मस्जिद कारी साहब, उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ मार्ग से होता हुआ भीखा शाह गेट पर पहुँचकर समाप्त होगा।
इस जगह पर मरकज़ी यौमुन्नबी कमेटी के ओर से नातिया कलाम का इनामी मुकाबला होता है। यह जानकारी मुस्लिम मुसाफिर खाना में शनिवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में कमेटी के अध्यक्ष व पूर्व चेयरमैन अल्पसंख्यक आयोग, उ.प्र. सरकार सैयद शकील अहमद बबलू व जनरल सेक्रेटरी जियाउद्दीन अहमद खाँ ने पत्रकारों को दी।
उन्होंने बताया कि ईद मिलादुन्नबी का यह प्राचीन ऐतिहासिक जुलूस 18 अक्टूबर को बाद नमाज़ इशा बेनियाबाग के पूर्वी छोर हड़हा मैदान से उठेगा। जुलूस परम्परागत रास्तों से भीखा शाह गेट पर पहुँचेगा। नातिया मुकाबला शुरू होने से पूर्व कमेटी के सरपरस्ते आला हजरत मौलाना सूफी मुहम्मद जकीउल्लाह साहब असदुल कादरी इफ्तेताही तकरीर विस्मिल्लाह खाँ मार्ग में फरमायेंगे।
इनामी अंजुमनों को बारहवीं रवीउल अव्वल 19 अक्टूबर को बाद नमाज इशा मरकज़ी यौमुन्नबी कमेटी के संरक्षक और पदाधिकारी मरकज़ की दालमण्डी स्थित नशगाह (ताज होटल) पर इनाम तकसीम करेंगे।
कमेटी के अध्यक्ष और जनरल सेक्रेटरी ने बताया कि इस्लाम धर्म के अंतिम पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम सारी दुनिया के लिए रहमत बनकर आये थे। उन्होंने लड़कियों को अल्लाह की रमहत बताया, उनको जिन्दा दफन करने से मना किया। यतीमों, विधवाओं और गुलामों को सम्मानित स्थान दिलाया। सम्पत्ति में लड़कियों को अधिकार दिलाया। दास प्रथा का खात्मा किया। मर्द और औरत दोनों की शिक्षा को फर्ज बताया।
आज पूरी दुनिया में इस्लाम के विरूद्ध साजिश की जा रही है। आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों को बदनाम किया जा रहा है। शरीअत के कानून को बदलने की बात की जा रही है। नबिए रहमत को मानने वाला मुसलमान आतंकवादी हो ही नहीं सकता। जिस इस्लाम ने पानी बेकार बहाने से मना किया वह नाहक किसी इंसान का खून बहाने की कैसे इजाजत दे सकता है।
शरीअत अल्लाह का कानून है, इसे इन्सान या दुनिया की हुकूमतों को बदलने का अधिकार नहीं है, हुकूमत को धार्मिक काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। मुसलमान अपने नबी की सीरत पर अमल करे।
वार्ता में आगा कमाल अहमद, मुहम्मद अवरार खाँ, शकील अहमद सिद्दीकी, अब्दुल अलीम जमाल, शकील अहमद, मुहम्मद यासीन गुड्डू, तौकीर अहमद, मुहम्मद वारिस बबलू, राशिद, इकबाल, रेयाज अहमद नूर, परवेज आलम, अली अहमद, इमरान खाँ, डॉ० अजफर सिद्दीकी, जमाल जफर, आलमगीर, राशिद खाँ, बाबू भाई, राशिद सिद्दीकी, हाजी ग्यासुद्दीन, शमशाद, मुश्ताक अहमद इकबाल भाई, सऊद खाँ, एस. जावेद, अली अख्तर, सत्तार खाँ, महमद खाँ, मुहम्मद अशरफ एडवोकेट, इकबाल अहमद, दिलशाद व अन्य मौजूद थे।
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