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वाराणसी में अमन व नेकी की दावत दे गये दुनिया के जाने माने उलेमा मुफ्ती सलमान मियां अजहरी

 वाराणसी में अमन व नेकी की दावत दे गये दुनिया के जाने माने उलेमा मुफ्ती सलमान मियां अजहरी मोहम्मद रिज़वान वाराणसी:- दुनिया के जाने माने उलेमा मुफ्ती सलमान मियां अजहरी बरेलवी आज बनारस में थे। उन्होनें जहाँ खानदाने आला हजरत के घराने के हजरत समनानी मियां बरेलवी से सिंह मेडिकल में जाकर मुलाकात की, वहीं कई जगहों पर उनका बनारस में बरेलवी मुस्लिमों ने जोरदार खैरमकदम किया। इस दौरान मुफ्ती सलमान मियां बरेलवी ने नेकी और अमन के साथ इस्लाम के सीधे व सच्चे रस्ते पर चलने की दावत दी। मदनपूरा तारतल्ले स्थित इब्राहिम की मस्जिद में उन्होंने शिरकत किया और लोगो से कहा कि आज तमाम बुराईयों का खात्मा सब्र, अमन, और नेकी के रस्ते पर चलकर किया जा सकता है आला की तालीम हमे न सिर्फ देश भक्त बनाती है। बल्कि वतन में अमन और शांति के साथ अपने मज़हब पर चलने की राह भी दिखती है। कुरान और हदीस की रोशनी में उन्होंने तमाम लोगों को नेकी की दावत दी। इससे पहले वो रात में सिंह मेडिकल गये जहाँ पर बीते दिन हुए औरंगाबाद एक्सीडेंट में घायल हजरत समनानी मियां से मुलाकात की और उनकी जल्द सेहत के लिए दुआएं की। आज सुबह वो रवाना हो गए।

समनानी मियां के लिए मस्जिदों में हुई दुआएं

 समनानी मियां के लिए मस्जिदों में हुई दुआएं मोहम्मद रिज़वान वाराणसी:- देश दुनिया के प्रमुख इस्लामी विध्दान आला हजरत इमाम अहमद रजा खां बरेलवी के पौत्र और हुजूर ताजुश्शरिया के भतीजे हुजूर समनानी मियां सिंह मेडिकल में भर्ती है। उनकी जिंदगी, सेहत और तंदरुस्ती के लिए बनारस ही नहीं, बल्कि देश भर की बरेलवी मस्जिदों में आज जुमे की नमाज के बाद नमाजियों ने दुआएं मांगी। खासकर बनारस में नई सड़क मदनपुरा, रेवड़ीतालाब, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, रामपुरा, दालमंडी, लल्लापुरा, पठानी टोला, कोयला बाजार, मकबूल आलम रोड, अर्दली बाजार आदि मस्जिदों में इमाम साहेबान ने दुआ में हाथ उठाया। गौरतलब हो कि हुजूर समनानी मियां की कार का बिहार के औरंगाबाद में 26 अगस्त की मध्यरात्रि एक बड़ा एक्सीडेंट हो गया था। इस बड़ी दुर्घटना में समनानी मियां समेत कई लोग बुरी तरह घायल हो गए थे। दुर्घटना इतनी जबरदस्त थी कि कार का परखच्चे उड़ गया। औरंगाबाद  के चिकित्सकों ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए सभी घायलों को तीन एम्बुलेंस के जरिये वाराणसी के सिंह मेडिकल रेफर कर दिया था। बनारस के सिंह मेडिकल में सभी घायलों का इलाज चल रहा है।

यौमे आशूरा पर मस्जिदों में हुआ शहादतनामा, घरों में मलीदा, शर्बत व खिचड़े की हुई फातेहा, रखा गया रोज़ा

 यौमे आशूरा पर मस्जिदों में हुआ शहादतनामा, घरों में मलीदा, शर्बत व खिचड़े की हुई फातेहा, रखा गया रोज़ा मोहम्मद रिजवान वाराणसी:- कर्बला के शहीदों की शहादत यौमे आशुरा पर घरों में जहां खिचड़े की फातेहा करायी गयी वहीं दूसरी ओर मस्जिदों में शहादतनामा हुआ जिसमें कर्बला के शहीदों की जिन्दगी और उनके किरदार पर उलेमा व इमाम साहेबान ने रौशनी डाली।   इससे पहले पूर्व संध्या पर नगर और आसपास के स•ाी इमामबाड़ों और इमाम चौकों पर अक़ीदत के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ताज़िया बैठा दी गयी थी। इस दौरान इमाम चौको, इमामबाड़ों और घरों में मलीदा, शर्बत आदि की फातेहा करायी गयी। फातेहा के बाद मन्नते मांगने वाला कर्बला के शहीदों की याद में रखी गयी ताज़िया की ज़ियारत करने लोगों का हुजुम शहर •ार में उमड़ा। इस दौरान हरिश्चन्द घाट स्थित कुम्हार के इमामबाड़े में कुम्हार की ताजिया, कोयला बाजार में नगीने की ताजिया, अर्दली बाजार की जरी व लल्लापुरा की मशहूर रांगे की ताजिया की जियारत को लोगों का हुजूम देर रात तक उमड़ा हुआ था। इस दौरान सोशल डिस्टेसिंग का पूरा ख्याल रखा जा रहा था।  इस बार  मोहर्रम पर कि...

इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद

 ...इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद सरफराज अहमद वाराणसी। कत्ले हुसैन असल में मरगे यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद...।  मौलाना मोहम्मद अली जौहर का लिखा यह कलाम कर्बला के शहीदों को खिराज़े अक़ीदत पेश करने में पूरी तरह कामयाब है। कर्बला की कहानी उस शख्सियत की, जिसके लिए मुसलमान मानते हैं कि उन्होंने अपना सिर कटाकर इस्लाम को बचा लिया। कहा जाता है कि इन्होंने दीन-ए-इस्लाम को बचाने के लिए एक से बढ़कर एक कुबार्नी दी। इनमें उनके छह माह के बेटे की शहादत •ाी शामिल हैं और 18 साल के बेटे की •ाी। जी हां कर्बला के शहीदे आज़म  इमाम हुसैन (रजि.) की हम बात कर रहे हैं। ये वही हुसैन हैं, जिनके लिए प्यारे नबी हज़रत मोहम्मद (स.) ने कहा था कि हुसैन मुझसे है और मैं हुसैन से। इसके बाद •ाी उस वक्त का ज़ालिम बादशाह यजीद ने उनको अपने सामने झुकाना चाहा, मगर इमाम हुसैन ने अपना सिर तो कटा दिया मगर यज़ीद के सामने झुके नहीं। उन्होंने दुनिया को उस इस्लाम की परि•ााषा समझाया जो उनके नाना हज़रत मोहम्मद (स.) ने तैयार की थी, उन्होंने काफी पहले ही दुनिया को बता दिया था कि दीन को बचाने के लिए कर्बल...

10 मोहर्रम से जुड़ा है इस्लामी इतिहास का कई चेप्टर, आप भी जाने पूरा डिटेल

 10 मोहर्रम से जुड़ा है इस्लामी इतिहास का कई चेप्टर, आप भी जाने पूरा डिटेल सरफराज अहमद शहादते हुसैन के साथ ही इस दिन कई नबियों का हुआ जन्म, हजरत नूह की कश्ती को मिला था किनारा वाराणसी :- मोहर्रम पर अकसर लोग मुबारक बाद देते सुने जाते है इस पर कई लोगो का कमेंट आता है कि मोहर्रम में तो इमाम हुसैन की शहादत हुई थी फिर नये साल की मुबारकबाद क्यों उलेमा कहते है कि इमाम हुसैन रजियउल्लाहु तआला अन्हु की शहादत के साथ ही इस महीने में बहुत सारे अच्छे काम भी हुए है पहले तो ये जानिये की मोहर्रम को मुहररमुल हराम क्यों कहते है इस लिए की जमानाये जाहिलियत में भी इस महीने में जंग हराम थी, इस लिए इसे मोहर्रमुल हराम भी कहा जाता है। इस महीने की 10 तारीख को हजरत सैय्यदना आदम अलैहिस्सलाम की तौबा रब ने कुबूल की थी। इसलिए इस  तारीख का मर्तबा काफी बढ़ जाता है। यही नहीं हजरत सैय्यदना यूनुस अलैहिस्सलाम की भी तौबा भी रब ने कुबूल की थी और वो मछली के पेट से बाहर आते थे। यही नहीं जब हजरत सैय्यदना नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती तूफान में फंसी थी तो वो मोहर्रम की 10 तारीख को ही जुदी पहाड़ के किनारे आकर ठहर गयी थी। उस दिन ...

यौमे आशूरा कल, आज बैठ जाएगी ताजिया, घरों में मलीदा, शर्बत की होगी फातेहा, रखे जाएंगे दो रोजे

 यौमे आशूरा कल, आज बैठ जाएगी ताजिया, घरों में मलीदा, शर्बत की होगी फातेहा, रखे जाएंगे दो रोजे मोहम्मद रिजवान वाराणसी :- आज 9 वीं मोहर्रम है यानी कर्बला के शहीदों की शहादत की पूर्व संध्या। आज शाम नगर औऱ आसपास के सभी इमामबाड़ों और इमाम चौकों पर अकीदत के साथ सोशल डिस्टनसिंग का पालन करते हुए ताजिया बैठा दी जाएगी। इस दौरान इमाम चौकों, इमामबाड़ों और घरों में मलीदा, शर्बत आदि की फातेहा करायी जाएगी। कल कर्बला के शहीदों की शहादत का दिन है। कर्बला के मैदान में 10 मोहर्रम को ही इमाम हुसैन समेत 72 लोग यजीदी सेना से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। इस दिन को यौमे आशूरा भी कहा जाता है। कोरोना काल को देखते हुए 10 मोहर्रम को सोशल डिस्टनसिंग के साथ ताजिये के फूल कर्बला में दफन किये जायेंगे। इस बार तमाम अंजुमनों ने भी ऐलान किया है कि कोई जुलूस नहीं निकलेगा। कल मस्जिदों में शहादत नामा होगा और मोमिनीन रोजा रखेंगे। सुन्नी घरों में खीचड़े की फातेहा होगी। मोहर्रम की 8 तारीख को इमाम हुसैन के बावफ़ा और बहादुर भाई हजरत अब्बास की याद में जगह-जगह मजलिसों का आयोजन कोविड नियमों के अनुपालन में किया गया। इसी क्रम में दालमंडी ...

हज़रत अब्बास का ताबूत सजा, गूंजा आंसुओं का नज़राना मोहर्रम : निभाई गयी 8 मोहर्रम की परम्परा

 हज़रत अब्बास का ताबूत सजा, गूंजा आंसुओं का नज़राना मोहर्रम : निभाई गयी 8 मोहर्रम की परम्परा मोहम्मद रिज़वान वाराणसी  मोहर्रम का महीना इनाम हुसैन और उनके 71 साथियों की याद में मनाया जाता है। बुधवार को मोहर्रम की 8 तारीख़ को  इमाम हुसैन के बावफ़ा और बहादुर भाई हज़रत अब्बास की याद में जगह-जगह मजलिसों का आयोजन कोविड नियमों के अनुपालन में किया गया। इसी क्रम में दालमंडी के चहमामा इलाके से ख्वाजा नब्बू साहब के इमामबड़े से उठने वाले विश्व प्रसिद्द और 250 साल पुराने तुर्बत के जुलूस की परम्परा का निर्वहन किया गया। कोरोना काल में शासन की मंशा के अनुरूप जुलूस नहीं उठाया गया।  पुरखों की परम्परा निभाई   जुलूस में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां आंसुओं का नज़राना अपनी ग़मज़दा शहनाई से दिया करते थे जिसे सुनने के लिए देश और विदेश से लोग आते थे। वहीँ फ़तेह अली खां और उनके हमराहियों ने भी अपने पुरखों की परम्परा का निर्वहन करते हुए शहनाई बजाई।  इस सम्बन्ध में जुलूस के आयोजक मुनाजिर हुसैन मंजू ने बताया कि इमाम हुसैन के भाई हज़रत अब्बास की याद में उठने वाला 8 मोहर्रम का जुलूस इस वर्ष भी क...